पुरानी कब्ज के कारन ,लक्षण, आयुर्वेदिक दवा और कब्ज़ के कारन होने वाले रोग

 

अगर आपको सप्ताह में सिर्फ दो या तीन बार मल त्याग होता है तो यह पुराणी कब्ज़ के लक्षण हो सकते है। लेकिन मल त्याग करना हर व्यक्ति का अलग अलग होता है। अगर कोही व्यक्ति दिन में दो या तीन बार मल त्याग कर रहा है। तो यह नार्मल होता है परन्तु अगर कोही व्यक्ति सप्ताह में दो या तीन बार ही मल त्याग कर रहा है तो फिर यह गंभी समस्या हो सकती है। 

पुरानी कब्ज के कारन ,लक्षण, आयुर्वेदिक दवा और कब्ज़ के कारन होने वाले रोग
पुरानी कब्ज के कारन ,लक्षण, आयुर्वेदिक दवा और कब्ज़ के कारन होने वाले रोग 

पुराणी कब्ज़ के कुछ लक्षण दिखाई देते है जैसे की मल सूखा और सख्त हो सकता है ,मल निकलते समय दर्द होता है ,और मल त्याग करने में कठिनाई हो रही है तो फिर यह पुराणी कब्ज़ के लक्षण हो सकते है। और इसके कारन आपको कुछ रोग भी हो सकते है। इसलिए आज हम आपको पुराणों कब्ज़ के कारन लक्षण,आयुर्वेदिक दवा और इसके कारन होने वाले रोगो के बारेमे बताएँगे।

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पुराने कब्ज़ के कारन 

कब्ज़ का कारन होता है खराब ,कच्चा भोजन। अगर आपका मल सूखा और सख्त है तो आपको अपने खाने में रेशेदार पदार्थो को समाविष्ट करना है और साथमे फाइबर युक्त पदार्थ भी आवश्यक होते है। क्योकि फाइबर युक्त पदार्थ पानी में जल्दी घुल जाते है। और इसका आसानीसे पाचन भी हो जाता है। इसके कारन मल नरम हो जाता है और बिना तकलीफ के आसानीसे गुदाद्वार से बाहर निकल जाता है। कब्ज़ के और भी कारन हो सकते है आइये जानते है  यह कारन,

  • पुराने कब्ज़ के कारन
    खाने में फाइबर युक्त पदार्थो की कमी और ज्यादा मात्रा में दूध ,पनीर ,मैदा ,तेल और मसालेदार पदार्थो का सेवन। 
  •  कम पानी पीने के कारन भी कब्ज़ की समस्या हो सकती है। 
  •  ज्यादा मात्रा में दर्द निवारण ,कैल्शियम की दवाइओका सेवन कारन। 
  •  दिनचर्या में बदलाव के कारण और ज्यादा सफर करने के कारन। 
  •  महिलाओं में गर्भवस्था के कारन। 
  • व्यायाम का अभाव या कम करना। 
  •  मल त्याग करने में देर करना। 
  •  फास्टफूड या जंकफूड का सेवन। 
  •  धूम्रपान के कारन। 
  •  रात में देर से भोजन करना।  
  •  समय पर भोजन न करना और ज्यादा देर तक जागना। 
  •  हार्मोन्स में गड़बड़ी या थाइराइड के कारन। 

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  पुराने कब्ज़ के लक्षण 

  • पुराने कब्ज़ के लक्षण
     कब्ज़ के रोगियों को कम भूक लगती है और उलटी की समस्या भी हो सकती है। 
  • कब्ज़ में मल त्याग करने में कठिनाई होती है क्योकि मल सख्त हो जाता है। 
  •  कब्ज़ के रोगियों को खाने का स्वाद नहीं लगता क्योकि जीभ सफ़ेद और मटमैली सी हो जाती है। 
  •  पेट फुला हुवा लगना और पेट में दर्द रहना। 
  • कब्ज़ के रोगियों को सप्ताह में दो या तीन बार ही मल त्याग की इच्छा होती है। 
  •  पेट में ज्यादा गैस बनना। 
  •  कुछ लोगो को सिर में भी दर्द रहता है। 
  •  मल त्याग होने पर भी परिपूर्णता का आभाव  
  •  मुँह में छाले पड़ना। 


पुराने कब्ज़ की आयुर्वेदिव दवा 

पुराने कब्ज़ की आयुर्वेदिव दवा
कब्ज़ की समस्या से बोहोत से लोग परेशान रहते है। अगर आपको भी यह समस्या है तो आपको खाने में तरल पदार्था और फाइबर युक्त पदार्थो को समविष्ट करना पड़ेगा। लेकिन इसके साथ आपको कुछ आयुर्वेदिक दवाइओं का भी सेवन करना चाहिए ताकि मल आसानीसे बाहेर निकल सखे। तो आइए जानते है पुराने कब्ज़ की आयुर्वेदिक दवा ,

1 . त्रिफला चूर्ण

त्रिफला को कब्ज़ की आयुर्वेदिव की सबसे अच्छी दवाई बताई जाती है। त्रिफला में पाए जाने वाले रेचक गुण और ग्लाइकोसिड कब्ज़ को दूर करने के लिए प्रभावी होते है। त्रिफला चूर्ण को आप एक ग्लास गर्म पानी के साथ ले सकते है। 

2 . बेल का फल 

बेल के फल के रेचक गुण कब्ज़ में रहत दिलाते है। कब्ज़ की समस्या में आपको बेल के फल का गुदा गुड़ के साथ मिक्स करके रात के खाने से पाहिले लेना है। इसमें आप इमली का पानी भी मिक्स कर सकते हो। 

3 . भुनी हुई सौंफ 

कब्ज़ के रोगियों को भुनी हुई सौंफ लाभदायक होती है। एक ग्लास गर्म पानी में भुनी हुई सौंफ को मिक्स करके पी सकते हो। इससे आपका पाचन तंत्र मजबूत बनता है। और मल त्याग ने में भी कठिनाई नहीं होती। सौंफ को रात को भिगोकर सुबह उसका पानी भी पी सकते है। 

4 . जीरा और अजवाइन 

जीरा और अजवाइन पेट समस्याओं में लाभदायक होता है। जीरा और अजवाइन को मिक्स करके एक ग्लास गर्म पानी के साथ पी सकते है। इसे भोजन के बाद पीने से भोजन जल्दी पच जाता है। 

4 . दूध और घी 

गर्म दूध के साथ एक चम्मच घी डालकर पीने से कब्ज़ में काफी लाभ होता है। क्योकि घी के कारन सख्त और कठोर मल नरम बन कर आसानी से बाहेर निकल जाता है। यह पुराणी कब्ज़ का सबसे लाभदाई उपाय है। 

5 . नीबू और काला नमक 

सुबह के समय खाली पेट एक ग्लास गर्म पानी में नीबू का रस और एक चुटकी काला नमक डालकर पीने से आपका पेट आसानी से साफ हो जाता है। काला नमक आप सब्जियों में भी यूज़ कर सकते हो इससे खाने स्वाद आएगा और खाना जल्दी पच जायेगा। 

6 . मुलेठी 

मुलेठी सबसे अच्छी आयुर्वेदिव दवा है हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करने की और मुलेठी का चूर्ण एक ग्लास पानी के साथ पीने से कब्ज़ में आपको राहत मिलती है। 

7 . मनुक्के 

कब्ज़ की समस्या में मनुक्के का सेवन लाभदायक होता है। मनुक्के को आप रात को भिगोकर सुबह खाली पेट दूध के साथ खाने से कब्ज़ में राहत मिलती है। मनुक्का पेट की समस्या में फायदेमंद साबित होता है और साथ में कमजोरी दूर करने के लिए भी रामबाण होता है। 

8 . मसाज 

आयुर्वेद में कब्ज़ के रोगियों के लिए मसाज लाभदायक बताई गई है। गर्म तेल में चुटकीभर अजवाइन मिलाकर उसे पेट के निचले हिस्से पर मसाज करना है इससे कब्ज़ में राहत मिलती है और साथमे पेट दर्द और एसिडिटी में भी लाभ मिलता है। 


कब्ज़ के कारन होने वाले रोग 

बवासीर 

आजकल बोहोत सारे लोगो को बवासीर की समस्या देखने को मिल रही है। और बवासीर एक पीड़ादायक बीमारी है। इसके कारन व्यक्ति बैठ भी नहीं पाता। बवासीर में गुदा के बाहेर और अंदर मस्सें बन जाते है। बवासीर में भी दो प्रकार है एक खुनी बवासीर और दूसरी बादी बवासीर। इसमें खुनी बवासीर बोहोत खतरनाक होती है इसमें मल आते वक्त खून भी निकलता है और इसके कारन वः व्यक्ति कमजोर हो जाता है। बवासीर होने का कारन है पेट अच्छी साफ न होना ,मल निकलते वक्त दर्द होना ,सख्त और सूखा मल निकलना ,गुदा के पास गांठ बनना। 

एनल फिशर 

जब गुदाद्वार के पास की नलिका कट जाती है या दरार पड़ जाती है तो इसे एनल फिशर कहते है। और यह सब कठोर मल निकलने के कारन होता है और मल निकलते समय दर्द और खून भी निकलता है। अगर आपको लम्बे समय कब्ज़ की समस्या है, या फिर गुदाद्वार के पास मल निकलते समय दर्द होता है ,खुजली होती है। तो यह सारे एनल फिशर के लक्षण होते है। 

सारांश 

इस लेख में हमने देखा की पुराणी कब्ज़ के कारन ,लक्षण क्या है और साथ में आयुर्वेदिक तरीकोंसे कैसे इसे ठीक करना है इसे भी जाना। इस लेख में दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। ऊपर दिए आयुर्वेदिक दवा को यूज़ करने से पाहिले डॉक्टर से सलाह जरूर कर ले और अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण है तो आप किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर से परमार्श कर ले।  


FAQ

Q 1 . पुराणी कब्ज़ के लक्षण क्या है ?

Ans - पुराणी कब्ज़ के लक्षण है ,सप्ताह में दो या तीन बार ही मल त्यागना ,मल कठोर ,सख्त ,और सूखा होना ,मल त्यागते समय दर्द होना ,पेट में ऐंठन और दर्द रहना ,उल्टी करने का मन करना ,सिर में दर्द होना, मुँह में छाले पड़ना यह सारे लक्षण होते है। 

Q 2 . कब्ज़ को तुरंत ख़त्म करने के लिए क्या करना चाहिए ?

Ans - कब्ज़ को तुरंत ख़त्म करने के लिए आपको त्रिफला चूर्ण का उपयोग करना चाहिए। इस चूर्ण को आप रात को सोने से पाहिले गर्म पानी के साथ पीना है। 

Q 3 . पुराणी कब्ज़ को कैसे ठीक किया जा सकता है ?

Ans - पुराणी कब्ज़ में आप दूध में घी डालकर पीने से फ़ायदा मिलता है। और मनुके का सेवन भी कर सकते हो रात को भगोये हुए मणुके सुबक खाली पेय दूध के साथ खाने से भी कब्ज़ में राहत मिलती है। 

Q 4 . लगातार कब्ज़ रहने के कारन ?

Ans - ख़राब जीवनशैली ,भोजन में फाइबर की कमी ,कम शारीरिक श्रम और ज्यादा तनाव ,रात को देर से खाने की आदत ,समय पर मल त्याग न करना ,टाइम पर भोजन न करना ऐसे बोहोत से कारन हो सकते है लगातार कब्ज़ रहने के। 

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